सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी में~ Powerful Shrimad Bhagavad Gita In Hindi 18 Chapters

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Sampurn Shrimad Bhagavad Gita

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  • नीचे दिए गए टेबल में सम्पूर्ण भगवद गीता गीता हिंदी में हर अध्याय और उसमे उल्लेखित विशेषताओं का लिंक दिया गया है जिसे आप क्लिक करके पढ़ सकते हैं :

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सम्पूर्ण भगवद गीता गीता हिंदी में व्यापक प्रकाशन और पठन होता रहा है , किन्तु मूलतः यह संस्कृत महाकाव्य महाभारत की एक उपकथा के रूप में प्राप्त है । महाभारत में वर्तमान कलियुग तक की घटनाओं का विवरण मिलता है ।

इसी युग के प्रारम्भ में आज से लगभग 5000 वर्ष पूर्व भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र तथा भक्त अर्जुन  को भगवद गीता का उपदेश दिया था । उनकी यह वार्ता , जो मानव इतिहास की सबसे महान दार्शनिक तथा धार्मिक वार्ताओं में से एक है , उस महायुद्ध के शुभारम्भ के पूर्व हुई , जो धृतराष्ट्र के सौ पुत्रों तथा उनके चचेरे भाई पाण्डवों के मध्य होने वाला भ्रातृघातक संघर्ष था ।

धृतराष्ट्र तथा पाण्डू भाई – भाई थे जिनका जन्म कुरुवंश में हुआ था और वे राजा भरत के वंशज थे , जिनके नाम पर ही महाभारत नाम पड़ा । चूंकि बड़ा भाई धृतराष्ट्र जन्म से अंधा था , अतएव राजसिंहासन उसे न मिलकर उसके छोटे भाई पाण्डु को मिला । पाण्डु की मृत्यु बहुत ही कम आयु में हो गई , अतएव उसके पांच पुत्र – युधिष्ठिर , भीम , अर्जुन , नकुल तथा सहदेव, धृतराष्ट्र की देखरेख में रख दिये गये , क्योंकि उसे कुछ काल के लिए राजा बना दिया गया था ।

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सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता हिंदी में~ Powerful Shrimad Bhagavad Gita In Hindi 18 Chapters
पांच पुत्र – युधिष्ठिर , भीम , अर्जुन , नकुल तथा सहदेव सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी में

इस तरह धृतराष्ट्र तथा पाण्डु के पुत्र एक ही राजमहल में बड़े हुए । दोनों ही को गुरु द्रोण द्वारा सैन्यकला का प्रशिक्षण दिया गया और पूज्य भीष्म पितामह उनके परामर्शदाता थे । तथापि धृतराष्ट्र के पुत्र , विशेषतः सबसे बड़ा पुत्र दुर्योधन पाण्डवों से घृणा और ईष्या करता था ।अन्ततः चतुर दुर्योधन ने पाण्डवों को जुआ खेलने के लिए ललकारा ।

उस द्यूतक्रीड़ा में छल के प्रयोग के कारण पाण्डव हार गए तथा उन्हें अपने राज्य से वंचित होना पड़ा और तेरह वर्ष तक वनवास के लिए जाना पड़ा । बनवास से लौटकर पाण्डवों ने धर्मसम्मत रूप से दुर्योधन से अपना राज्य मांगा , किन्तु उसने देने से इनकार कर दिया । जब उनकी याचना अस्वीकृत हो गई , तो युद्ध निश्चित था ।

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तथामि कृष्ण ने विपक्षियों की इच्छानुसार ही युद्ध में सम्मिलित होने का प्रस्ताव रखा । वे स्वयं एक परामर्शदाता तथा सहायक के रूप में उपस्थित रहेंगे ।इस प्रकार कृष्ण अर्जुन के सारथी बने और उन्होंने उस सुप्रसिद्ध धनुर्धर का रथ हiकना स्वीकार किया । इस तरह हम उस बिन्दु तक पहुंच जाते हैं जहाँ से भगवद गीता का शुभारम्भ होता है – दोनों ओर को सेना युद्ध के लिए तैयार खड़ी है और धृतराष्ट्र अपने सचिव सज्जय से पुछ रहा है कि उन रोनाओं ने क्या किया ?

इस तरह सारी पृष्ठभूमि तैयार है । आवश्यकता है केवल इस अनुवाद तथा भाष्य के विषय में संक्षिपा टिप्पणी की । भगवद्गीता के अंग्रेजी अनुवादकों में यह सामान्य प्रवृत्ति पाई जाती है कि वे अपनी विचारधारा तथा दर्शन को स्थान देने के लिए कृष्ण नामक व्यक्ति को ताक पर रख देते हैं ।

जैसा कि भगवद गीता स्वयं अपने विषय में कहती है । अतः यह अनुवाद तथा इसी के साथ संलग्न भाष्य पाठक को कृष्ण की ओर निर्देशित करता है , उनसे दूर नहीं ले जाता । इस दृष्टि से भगवदगीता धारूप अनुपम है । साथ ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस तरह यह पूर्णतया ग्राह्य तथा संगत बन जाती है ।

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स प्रयास में हमने सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी में के 18 अध्यायों और उनके संस्कृत श्लोकों का सरल अनुवाद हिंदी सहित किया है ।

                             जिसे आप लिंक क्लिक करके पढ़ सकते हैं : -   

सैन्यनिरीक्षण ~  अध्याय एक

गीता का सार  ~  अध्याय दो

कर्मयोग ~ अध्याय तीन 

ज्ञानकर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय चार 

कर्मसंन्यासयोग ~ अध्याय पाँच

आत्मसंयमयोग ~  छठा अध्याय

ज्ञानविज्ञानयोग ~  सातवाँ अध्याय

अक्षरब्रह्मयोग ~ आठवाँ अध्याय

राजविद्याराजगुह्ययोग ~ नौवाँ अध्याय

विभूतियोग ~ दसवाँ अध्याय

विश्वरूपदर्शनयोग ~ ग्यारहवाँ अध्याय

भक्तियोग ~ बारहवाँ अध्याय

क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग ~ तेरहवाँ अध्याय

गुणत्रयविभागयोग ~ चौदहवाँ अध्याय

पुरुषोत्तमयोग ~ पंद्रहवाँ अध्याय

दैवासुरसम्पद्विभागयोग ~ सोलहवाँ अध्याय

श्रद्धात्रयविभागयोग ~ सत्रहवाँ अध्याय

मोक्षसंन्यासयोग ~ अठारहवाँ अध्याय

सम्पूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता हिंदी में~ Powerful Shrimad Bhagavad Gita In Hindi 18 Chapters
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सारांश

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सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी में के वक्ता एवं उसी के साथ चरम लक्ष्य भी स्वयं कृष्ण है अतएव यही एकमात्र ऐसा अनुवाद है जो इस महान शास्त्र को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करता है । संस्कृतपीडिया के माध्यम से भी हम सम्पूर्ण भगवद गीता हिंदी में का सरल हिंदी अनुवाद करने का प्रयास किया गया है ।


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