आरती श्री लक्ष्मी जी की  ~ Aarti Shri Lakshmi Ji

आरती श्री लक्ष्मी जी की

आज के युग में धन और वैभव के बिना मनुष्य का जीवन अधूरा माना जाता है । यही कारण है कि कलयुग में माता लक्ष्मी जी को सबसे ज्यादा पूजा जाता है । इसी कारण इन्हें धन और समृद्धि की साक्षात् देवी माना जाता है । देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्री लक्ष्मी … Read more

आरती श्री हनुमानजी की ~ आरती  कीजै  हनुमान  लला  की

आरती श्री हनुमानजी की

मंगलवार के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने के हनुमान चालीसा का जरूर करें पाठ। पूजा के समय उनकी इस आरती को उतारना न भूलें । हनुमान जी की आरती का पाठ करने से सभी तरह के डर से मुक्ति मिलती है. आइए पढ़ें बजरंगबली की आरती ….. आरती श्री हनुमान जी की आरती  कीजै  हनुमान … Read more

आरती श्री शिव जी की ~ ॐ  जय  शिव  ओंकारा

आरती श्री शिव जी की

श्री शिवजी की आरती हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शिव त्रिमूर्ति के बीच संहारक हैं. वह योगियों के देवता हैं और एक सर्वज्ञ योगी के रूप में वर्णित हैं, जो कैलाश पर्वत पर एक तपस्वी जीवन जीते हैं. शिव को कई नामों से जाना जाता है – महादेव, पशुपति, भैरव, विश्वनाथ, भोले नाथ, शंभू और … Read more

ओउम जय जगदीश हरे आरती ~ व‍िष्‍णुजी की आरती , विष्णु भगवान की आरती

ओउम जय जगदीश हरे आरती ~ व‍िष्‍णुजी की आरती

विष्णु भगवान जी की आरती दुनियाँ में सबसे ज्यादा लोकप्रिय आरती ओम जय जगदीश हरे पं. श्रद्धाराम जी द्वारा लिखी गई थी । यह आरती मूलतः भगवान विष्णु को समर्पित है फिर भी इस आरती को किसी भी पूजा , उत्सव पर गाया जाता हैं । कुछ भक्तों का मानना है कि इस आरती का मनन करने … Read more

श्री गणेश जी की आरती ~ Shri Ganesh Ji Ki Aarti

श्री गणेश जी की आरती ~ Shri Ganesh Ji Aarti

आरती श्री गणेश जी की सभी विघ्न दूर करने के लिए गणेश भक्त बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं साथ ही उनकी आरती भी गाते है। वक्रतुण्ड महाकाय , सूर्यकोटि समप्रभः ।  निर्विघ्न कुरु में देव , सर्वकार्येषु सर्वदा ॥  आरती श्री गणेश जी की  जय गणेश , जय गणेश , जय गणेश देवा ।  माता   जाकी   पार्वती … Read more

Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta In Hindi ~ संपूर्ण श्रीमद भगवद गीता हिंदी में

Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta In Hindi ~ संपूर्ण श्रीमद भगवद गीता हिंदी में

Sampurn Shrimad Bhagwat Geeta नीचे दिए गए टेबल में हर अध्याय और उसमे उल्लेखित विशेषताओं का लिंक दिया गया है जिसे आप क्लिक करके पढ़ सकते हैं : भगवद्गीता का व्यापक प्रकाशन और पठन होता रहा है , किन्तु मूलतः यह संस्कृत महाकाव्य महाभारत की एक उपकथा के रूप में प्राप्त है । महाभारत में वर्तमान कलियुग … Read more

भगवद गीता – अध्याय 18.7 ~ श्री गीताजी के माहात्म्य विषय का वर्णन  / Bhagwad Geeta Chapter -18

भगवद गीता – अध्याय 18

अध्याय अठारह  (Chapter -18) भगवद गीता – अध्याय 18  में शलोक 67 से  शलोक 78  श्री गीताजी के माहात्म्य विषय का वर्णन ! इदं   ते   नातपस्काय    नाभक्ताय   कदाचन ।  न  चाशुश्रूषवे  वाच्यं  न  च  मां  योऽभ्यसूयति ॥ ६७ ॥   इदम्   –   यह    ;   ते    –   तुम्हारे द्वारा    ;   न   –   कभी नहीं    ;     अतपस्काय    –    असंयमी के लिए    ;    … Read more

भगवद गीता – अध्याय 18.6 ~ फल सहित भक्ति सहित कर्मयोग के विषय का वर्णन  / Bhagwad Geeta Chapter -18

भगवद गीता – अध्याय 18

अध्याय अठारह  (Chapter -18) भगवद गीता – अध्याय 18  में शलोक 56 से  शलोक 66  फल सहित भक्ति सहित कर्मयोग के विषय का वर्णन ! सर्वकर्माण्यपि  सदा  कुर्वाणो  मद्व्यपाश्रयः ।  मत्प्रसादादवाप्नोति   शाश्वतं    पदमव्ययम् ॥ ५६ ॥   सर्व   –  समस्त   ;    कर्माणि    –   कार्यकलाप को     ;      अपि   –   यद्यपि    ;     व्यपाश्रयः    –   मेरे संरक्षण में     ;    सदा     –     सदैव    ;     कुर्वाण: … Read more

भगवद गीता – अध्याय 18.5 ~ फल सहित वर्ण धर्म के विषय का वर्णन  / Bhagwad Geeta Chapter -18

भगवद गीता – अध्याय 18

अध्याय अठारह  (Chapter -18) भगवद गीता – अध्याय 18  में शलोक 49 से  शलोक  55  वर्ण धर्म सहित ज्ञाननिष्ठा के विषय का वर्णन ! असक्तबुद्धिः  सर्वत्र   जितात्मा   विगतस्पृहः ।  नैष्कर्म्यसिद्धिं   परमां   संन्यासेनाधिगच्छति ॥ ४९ ॥ असक्त-बुद्धिः    –   आसक्ति रहित बुद्धि वाला    ;     सर्वत्र     –   सभी जगह    ;    जित-आत्मा    – मन के ऊपर संयम रखने वाला     ;    विगत-स्पृहः   – … Read more

भगवद गीता – अध्याय 18.4 ~ फल सहित वर्ण धर्म के विषय का वर्णन  / Bhagwad Geeta Chapter -18

भगवद गीता – अध्याय 18

अध्याय अठारह  (Chapter -18) भगवद गीता – अध्याय 18  में शलोक 41 से  शलोक 48 फल सहित वर्ण धर्म के विषय का वर्णन ! ब्राह्मणक्षत्रियविशां  शूद्राणां  च   परन्तप ।  कर्माणि  प्रविभक्तानि  स्वभावप्रभवैर्गुणैः ॥ ४१ ॥   ब्राह्मण    –     ब्राह्मण   ;     क्षत्रिय    –   क्षत्रिय   ;    विशाम्    –    तथा वैश्यों का    ;     शूद्राणाम्    –     शुद्रों का    ;    च    –  तथा   ;     परन्तप   –    … Read more